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Friday, 21 October 2016

सर्व पितृ शांति प्रयोग

पितृ पक्ष शुरू होने वाला है और इन १५ दिन में प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को सवार सकता है क्योंकि इन १५ दिनों में पितृ लोक से हमारे पितृ धरती पर आते है और यदि हम श्राद्ध आदि विधि से उन्हें संतुष्ट कर दे तो श्राद्ध से संतुष्ट पितृ हमे आशीर्वाद देते है ! इन १५ दिनों में यदि हम श्राद आदि क्रियाये ना करे तो हमारे पितृ भूखे ही पितृ लोक को वापिस चले जाते है और हमे श्राप दे देते है जिससे अनेकों प्रकार की विपदाए हमारे जीवन को घेर लेती है और जीवन एक तरह की नीरसता से भर जाता है ! पितरों के रुष्ट हो जाने पर घर में कलेश की स्थिति बन जाती है ! व्यक्ति का अध्यात्मिक विकास रुक जाता है ! पितरों के रुष्ट हो जाने पर घर में प्रेत बाधाऐं उत्पन्न हो जाती है और व्यक्ति का सारा धन बीमारिओं में ही निकल जाता है !

पितरों को संतुष्ट करने के अनेकों उपाय  है ! 

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उपाय   ||


१. यदि हम कौवे की सेवा करे तो हमारे पितृ संतुष्ट होते है !

२. पितृ पक्ष में श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करे और उस पाठ का दान अपने गौत्र के पितरों के नाम पर दान करने से पितृ संतुष्ट होते है और उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है !

३. यदि पितृ पक्ष में गरुड़ पूरण का पाठ किया जाए और पाठ के फल का दान अपने गौत्र के पितरों के नाम पर दान करने से पितृ संतुष्ट होते है और नरक की यातनाओं से बच जाते है एवं मोक्षगामी होते है !

४. पीपल वृक्ष की जड़ में मीठा जल अर्पित करने से और दिया जलाने से भी पितृ संतुष्ट होते है ! 

५. कुत्तों की सेवा करने और मछलियो को आटा खिलाने से भी पितृ संतुष्ट होते है !

६. यदि व्यक्ति अपने कुलदेवता कुलदेवी या कुलगुरु का पूजन करे तो कुल में उत्पन्न होने वाले सभी पितृ संतुष्ट हो जाते है !

७. यदि देवी भागवत का पाठ किया जाए और पाठ का पुण्य अपने पितरों के लिए दान किया जाए तो भी पितृ संतुष्ट होते है ! 

ऐसे अनेकों उपाएँ है जिससे पितृ संतुष्ट होते है ! श्रीमद्भागवत गीता के १०वे अध्याय के २९वे श्लोक में में भगवान् श्रीकृष्ण कहते है कि पितरों में अर्यमा पितृ मैं हूँ ! पितृ अर्यमा को सभी पितरों का पितृ माना जाता है ! अतः यदि केवल अर्यमा पितृ को संतुष्ट कर दिया जाए तो हमारे पितृ संतुष्ट हो जायेंगे ! 

यहाँ मैं एक बहुत ही सरल विधान बता रहा हूँ ! आप इसे करे और अपने जीवन को धन्य बनाये ! 



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विधान  ||

काले और सफ़ेद तिलों को गाये के शुद्ध घी में मिला कर मिश्रण ले ! यदि गाये का घी ना मिले तो साधारण देसी घी इस्तेमाल करे ! घी की ज्योत जलाए और एक गोबर के उपले को सुलगा ले ! उस सुलगते हुए उपले पर उस  मिश्रण की १०८ आहुति डाले ! फिर उस आहुति के बाद दही और शक्कर में ५ रोटीयो के छोटे-छोटे टुकड़े कर मिला ले ! अब इस मिश्रण की भी २१ आहुति दे ! और उसी उपले पर अंत में ५ आहुति देसी घी की दे और ५ बार गंगा जल का छींटा मारे ! यदि गंगाजल न हो तो साधारण जल या किसी तीर्थ के जल का छींटा भी लगा सकते है ! इस क्रिया के बाद अर्यमा नामक पितृ से प्रार्थना करे कि मेरे गौत्र के सभी पितरो को संतुष्ट करे ! दही शक्कर और रोटियों के बचे हुए उस मिश्रण को अपने घर की छत पर डाल दे और उसके चारो तरफ एक लोटा पानी से घेरा/गोला बना दे ! 

ऐसा १५ दिन मतलब पूरे पितृ पक्ष में करे ! और अंतिम दिन अपने पितरों के नाम से किसी ब्राह्मन को भोजन कराये एवं वस्त्र आदि देकर संतुष्ट करे ! यदि कोई ब्राह्मण ना मिले तो किसी गरीब व्यक्ति को भी दान कर सकते है ! 

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आहुति देने का मंत्र  ||

ॐ अर्यमाए नमः स्वाहा !!

नोट - मंत्र में स्वाहा बोलते समय अग्नि में आहुति देनी है और यदि गोबर का उपला ना मिले तो आप आम की लकड़ी या लाल चन्दन और चन्दन की लकड़ी का भी इस्तेमाल कर सकते है ! 

आप सब पर आपके पितरों की कृपा बनी रहे.. 

जय सदगुरुदेव !!

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